मां ऐसी ही होती है


मां होती ही ऐसी है। बच्चा हंसता है, तो मां हंसती है। वह रोता है, तो मां भी रोती है। मां की ममता को पहचाना बहुत कम लोगों ने है। उसके लिये हम हमेशा छोटे ही हैं, दुलारे भी हैं और प्यारे भी। उसके जाने के बाद उसकी याद हमें आयेगी, यह हम जानते हैं। वह कभी न लौट कर आने के लिये हमसे केवल एक बार विदाई लेगी। यह विदाई अंतिम होगी।

हम कहते हैं कि मां किस्मत वालों को मिलती हैं। वे किस्मत वालें हैं जिनके पास उनकी मां है। जो लोग अपनी मां को खो चुके हैं, वे शायद दुखी हैं और कभी-कभी बहुत दुखी भी। उनकी आंखों में आंसू हैं क्योंकि कोई अपना उन्हें छोड़ कर चला गया। उसके अंतिम पल में कई अपनी मां के पास थे और कई को पता ही नहीं कि उनकी भी कभी कोई मां थी। पाने से ज्यादा खोने का गम होता है। और पीड़ा तब अधिक बढ़ जाती है, जब आप उसे खो देते हैं जिसे आप बहुत चाहते हैं, शायद बहुत ज्यादा। यह सब इतना अचानक हो जाता है कि आपको पता ही नहीं चलता कि कोई आपसे कब का रुठ कर चला गया। ऐसी जगह जहां से लौटना हर किसी के लिये नामुमकिन रहा है। मेरी आंखें नम हो गयी हैं जब मैं यह लिख रहा हूं क्योंकि मेरे पास भी ऐसा कुछ घटा है जिसके बाद यह लिख सका हूं। एक बच्चा कभी पहले बहुत खुश हुआ करता था। उसकी हंसी रोके नहीं रुकती थी। वह हंसता हुआ अच्छा लगता था। बातें बनाना कोई उससे सीखे। मुझे उसने प्रभावित किया था। वह अब दुखी है और उसका दुख कभी न खत्म होने वाला है। उसका कोई उसे छोड़ कर चला गया और वह एकदम अकेला पड़ गया। उसकी आंखें किसी को खोजती होंगी, वह अब उसके सामने नहीं है। वह रोता है और जी भर कर रोता है। भला एक 12 साल का बच्चा कर भी क्या सकता है। ऐसे मौकों पर रोया ही तो जाता है। उसकी मां अब रही नहीं। उसकी यादें हैं बस, जिनको ध्यान कर सिर्फ रोना आता है। वह प्यार अब नहीं रहा, दुलार पीछे छूट गया।

किसी को भूला इतनी आसानी से नहीं जा सकता। इसलिये कहा गया है-
It takes only a minute to get a crush on someone, an hour to like someone, and a day to love someone but it takes a lifetime to forget someone.

यह सच है कि अपनों से दूरी और बहुत लंबी दूरी जिंदगी भर का दर्द दे जाती है। हम उन्हें खुशी पता नहीं कितने दे पाते हैं लेकिन उनके दूर चले जाने पर रोते बहुत हैं। यह हमारी कमजोरी है कि हम भावनाओं में आसानी से बह जाते हैं। यह लगाव अदृश्य होता है, लेकिन मजबूती से जुड़ा हुआ। इसकी डोर कभी कमजोर नहीं पड़ती और शायद समय-दर-समय और मजबूत होती जाती है। यही जीवन का सच है। रिश्तों की डोरी हमें जोड़े रखती है, नहीं तो हम कब के बिखर गये होते।

मां के लिये यह गीत गुनगुनाया जा सकता है-
‘तेरी उंगली पकड़ के चला,
ममता के आंचल में पला,
मां ओ मेरी मां, मैं तेरा लाडला।’

-harminder singh

2 comments:

  1. अफसोस अन्‍य बेशकीमती चीजों की तरह... मॉं जि‍नके पास है वो उसकी बेशकीमत मौजूदगी से गाफि‍ल रहते हैं...

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  2. sachmuch maan aisi hi hoti hai...afsos yah hai ki uski keemat hum us samay nahin samajhte jab woh paas hoti hai..
    http://www.sharmakailashc.blogspot.com/

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