अकेला हूं मैं

जाले बुन रहा यादों के,
किसी सन्नाटे से कम नहीं,

---------------------
---------------------

डूबते भंवर का वासी हूं,
सफल में चला अकेला,

---------------------
---------------------

शांत नहीं अशांत भरा,
कोलाहल की पुरवाई नहीं,

---------------------
---------------------

हताश, निराश, जर्जर तन,
मिट गयी जो आस थी,

---------------------
---------------------

साथ नहीं किसी का अब,
क्योंकि अकेला हूं मैं।

-harminder singh

3 comments:

  1. “मै अकेला नहीं हूँ”

    वो पैसे के पीछे भागी
    मै उसके पीछे भागा
    मेरे अपने मेरे पीछे भागे
    और अपनों के पीछे कुछ गैर
    पर खुदा का खेल देखो
    उसे पैसा मिल गया
    गैरो को वो मिल गयी
    मेरे अपनों को दुनिया मिल गयी
    अकेला रह गया तो सिर्फ और सिर्फ मै
    तभी मेरी तन्हाई मुझसे लिपट कर बोली
    तू अकेला नहीं है पगले, मै तेरे साथ हू”
    “”वादा है कभी हाथ ना छोडूंगी
    मरकर भी देख ले, साथ न छोडूंगी”

    प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
    अगर अच्छा लगा तो ब्लॉग पर जाएये, लिंक: http://prabhat-wwwprabhatkumarbhardwaj.blogspot.com/

    ReplyDelete
  2. सच को परिभाषित करती सुन्दर रचना।

    ReplyDelete
  3. मन को छूती सुन्दर रचना..

    ReplyDelete