बुढ़ापा यही तो है!
















खामोशी बढ़ रही है,
नींद अब आती नहीं,
क्यों दर्द बढ़ रहा है,
जीवन बोझिल लगता है,
क्या करें मजबूरी है,
बुढ़ापा यही तो है!

खो गया कुछ,
ढूंढ़ रहा कहीं,
पुरानापन हर जगह,
समायी है जर्जरता,
यादों को याद करे,
बुढ़ापा यही तो है!

-Harminder Singh