जिंदगी तो रोज छपती है

ज़िन्दगी-लाइफ-प्रकृति

ज़िन्दगी एक ख्वाहिश के साथ है जो एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव गुज़रती रहती है.

जिंदगी तो रोज छपती है,
कभी इस पड़ाव, कभी उस पड़ाव,
जिंदगी सवाल करती है,
कभी सीधे, कभी आड़े-तिरछे,
जिंदगी मचलती बड़ी है,
कभी फिसलकर, कभी इठलाकर,

देखता हूं, कभी-कभार मैं भी,
ऐसा क्यों नहीं कि मैं हंसता रहूं हर पल,
मुमकिन जो भी है, पर पूरा नहीं,
यही खासियत है जिंदगी की,
उधड़ती-सिलती-चलती-दौड़ती है,

जिंदगी उड़ान भरती है,
कभी गोते लगाकर, कभी सरसराकर,
जिंदगी मुश्किल साज है,
कभी गुनगुनाकर, कभी सुर लगाकर,
जिंदगी बहती नदी है,
कभी बहकर, कभी सहकर।

-हरमिन्दर सिंह.

6 comments:

  1. दिनांक 26/01/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस प्रस्तुति में....
    सादर आमंत्रित हैं...

    ReplyDelete
  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - राष्ट्रीय मतदाता दिवस और राष्ट्रपति का सन्देश में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    ReplyDelete
  3. शुभ प्रभात
    वाह..
    आनन्दित हुई
    सादर

    ReplyDelete
  4. सुन्दर शब्द रचना
    गणत्रंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  5. The National Testing Agency (NTA) will conduct the UGC NET 2020 exam on behalf of University Grants Commission (UGC). This exam will be conducted to determine the eligibility of the candidates for the post of assistant professor and junior research fellow (JRF).

    ReplyDelete