जिंदगी की आस में जिंदगी कट रही

कहानियां ज़िन्दगी से शुरू होकर ज़िन्दगी पर ख़त्म होती हैं.
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खुशी के तारों की छांव में जिंदगी दो पल बदल रही,
हवाओं की तरह मचलते हुए सितार सी बह रही,

शांत, हिलौरे मारती हुई भी,
उम्र की दास्तान जो सच है,

अपने में सिमटी हुई और मुस्कान से भर रही,
झुर्रियों का रौब नहीं, बेहिचक बढ़ रही,

सुनहरी यादों को पुकार कर,
मीठी बोली बोलकर,

उतर रही कोई अनोखी वजह भर रही,
आसमान से डोली सजी निकल रही,

कसक बाकी, मन चुभ रहा,
बूढ़ी आंखों से देख कर,

उम्रदराजों की भावना की गठरी पिघल रही,
जिंदगी की आस में जिंदगी कट रही।

-हरमिंदर सिंह.

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11 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति।

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    1. ज्योति जी बहुत बहुत आभार..

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  2. सुंदर प्रस्तुति।

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  3. बहुत खूब ... यूँ ही जिंदगी कटे तो जीना सफल है ...

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    1. शुक्रिया दिगंबर जी.

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस : सुनील दत्त और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया हर्षवर्धन जी..

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  5. Replies
    1. शुक्रिया सुमन जी.

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  6. सुनहरी यादों को पुकार कर,
    मीठी बोली बोलकर,

    उतर रही कोई अनोखी वजह भर रही,
    आसमान से डोली सजी निकल रही,
    वाह्ह ! आदरणीय ,बहुत ख़ूब! सुन्दर अभिव्यक्ति, सत्य को उजागर करती आभार। "एकलव्य"

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    1. ध्रुव जी, आपका हृदय से आभार.

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