एच. आर. डायरीज़ : मानव संसाधन विभाग की कहानी कहता पहला हिंदी उपन्यास

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कुछ नौजवान जिन्होंने नयी दुनिया में कदम रखा, उलझ गये दौड़-भाग के पाटों में। जिंदगी की पेचीदगियों को उन्होंने अपनी तरह से हल करने की कोशिश की। अनेक रोचक मोड़ आते गये। वे हंसे, रोये, घबराये, लेकिन रुके नहीं। आखिर में उन्होंने पाया कि नौकरी करना कोई बच्चों का खेल नहीं! उनकी जिंदगी का एक हिस्सा उनसे हर बार सवाल करता है कि यह दौड़ यूं ही क्यों चल रही है? हमें क्यों लगता है कि हम एक जगह बंधे हुए हैं? क्या यह हमारी नियति है?

यह पहली बार है कि हिंदी में एच.आर. विभाग (Human Resource Deptt.) पर एक कहानी इस तरह बुनी गयी है. आप खुद को शुरू से आखिर तक उससे दूर नहीं होने देंगे.मुझे लगता है कि जो युवा नौकरी करने की शुरुआत में हैं या कर रहे हैं, उन्हें यह जरुर पढ़नी चाहिये. यह कहानी हर नौकरीपेशा को अपनी-सी लगेगी.
पात्र युवा हैं, और संवाद छोटे हैं, जो आजकल कम ही देखने को मिलते हैं. युवाओं की यह कहानी आपको अधिकतर गुदगुदाती रहेगी, कई जगह भावनात्मक क्षण भी आयेंगे.

उम्मीद है कि विजय और तारा आपको बेहद पसंद आएंगे.

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