Header Ads

बुढ़ापा ऐसा क्यों?

















हौंसला चुप है,
किसी ओट में छिपा,
मायूस, करवटें बदल,
पहाड़-सी रात,

----------------------
----------------------

धुंधली यादों में,
जीवन कट रहा,
कचोट रहा कुछ,
धीरे-धीरे ही सही,

----------------------
----------------------

सिमट रहा मैं,
खुद में चुपचाप,
हाय! यह बुढ़ापा ऐसा क्यों?

-Harminder Singh

1 comment:

  1. धुंधली यादों में,
    जीवन कट रहा,
    कचोट रहा कुछ,
    धीरे-धीरे ही सही,
    सटीक और सार्थक लिखा है ... अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete