तुम अब छोटी बच्ची नहीं रहीं





























Mansi....


वक्त कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता। दसवीं लगभग बीत ही चुकी। कल हम छोटे थे, देखते ही देखते कितनी क्लास पार कर गये। नौवीं के सवाल कभी टफ लगते थे, अब दसवीं भी उतनी हार्ड नहीं लगती।

जब हम घर के सामने क्रिकेट खेलते थे, तो दो छोटी बच्चियां एक-दूसरे की उंगलियां पकड़ कर वहां से गुजरतीं। हम उन्हें वहां से जाने को कहते। हममें से एक-दो उन्हें मामूली डांट भी देते। दोनों मुंह पिचकाकर चली भी जातीं, लेकिन एक बात उनमें देखने लायक भी थी कि दोनों का हाथ नहीं छूटता था।

शुभांगी से मुझे पता है तुमने बहुत कुछ सीखा है। उसके व्यवहार के कारण ही सब उसे पसंद करते हैं। तुम उसे हमेशा याद रखोगी और वह तुम्हें। मेरी मम्मी ने शुभी से एक बार कहा था कि उन दोनों (तुम्हारा और शु्भांगी) का पता नहीं चलता, कि वे यहां हैं या नहीं, लेकिन तुम शुभी अकेली ही काफी हो।

उस दिन जब स्वीटी चश्मे लगाकर आयी तो किसी ने मुझसे कहा कि आपने हर किसी के चश्मे लगवा दिए। फिर शुभी ने नाम गिनवाने शुरु कर दिए। सबसे पहले तुम्हारा नाम लिया।

जब RATIO का चैप्टर आता है तो हर कोई तुम्हारा नाम लेता है। यानि तुमने मैथ्स में भी अपना दखल दे रखा है।

रही बात पैन के कैप चटकाने की या उन्हें छिटकाने की या उनका कचूमर निकालने की, तो प्रभात से पूछ लेना।

आकाश ने इंग्लिश की कोपी में एक वर्ड लिखा जो इस तरह था -Mansi-oned जिसे उसने अलग तरह से break कर रखा है। अब वह उसकी स्पेलिंग कभी भूलेगा नहीं।

एक बार तुम्हारे ऊपर मकड़ी गिर गयी थी। तुम इतनी जोर से चीखीं कि मुझे कुछ देर तक बिल्कुल सुनाई नहीं दिया। तुमने शु्भांगी को भी डरा दिया था।

शुरु में तुम गुमसुम-गर्ल हुआ करती थीं, मगर अब तुम्हें इंटैलिजेंट-गर्ल कहा जा सकता है।

एक बार मैंने सुमित, शु्भांगी और तुमसे कहा था कि जिसके मैथ्स में सौ में से सौ नंबर आयेंगे उसे मेरी ओर से एक चोकलेट मिलेगा। तुम्हारे पूरे माक्र्स आये, लेकिन तुमने मुझसे कुछ नहीं कहा, जबकि सुमित मेरे पीछे आजतक पड़ा हुआ है। अब मेरे पास नया बहाना है कि बोर्ड में पूरे नंबर लाओ, एक नहीं हर सब्जेक्ट के लिए एक चोकलेट ले जाओ। तो अब सुमित को थोड़ी तसल्ली है।

खैर, फालतू की बातें काफी हो गयीं, Now its time to be serious.

हमेशा अपने मम्मी-पापा की बात मानना क्योंकि किसी के माता-पिता अपने बच्चों का बुरा नहीं सोचते। तुम्हारी मम्मी तुम्हें डांट भी देती हैं, तो मैंने सुना है कि तुम मुंह फुला लेती हो। वैसे ऐसा करने से काम नहीं चलने वाला। अब तुम छोटी बच्ची नहीं हो। उनकी पहले सुनो, बाद में अपनी। बड़ों का काम समझाना होता है, और छोटों का समझना। उन्होंने हमसे ज्यादा दुनिया देखी है और पहले भी, इसलिए वे हमें हमेशा अच्छी हिदायत देंगे। हम छोटी-छोटी बातों का बुरा मान जाते हैं और यह कभी नहीं सोचते कि हमारे मम्मी-पापा हमारे लिए क्या कर रहे हैं और कितना कर रहे हैं। हां, भाई को थोड़ा Ignore कर सकती हो, लेकिन वह भी तो तुम्हारे बारे में अच्छा ही सोचता है।

भीड़ में चलने की कोशिश मत करना, क्योंकि भीड़ में तो सब चलते हैं।

Lots of wishes for the future.

-Harminder Singh

7 march 2011

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