जीवन और मरण




















तन्हाई
में जीना है
और मर जाना है।
जीवन-मरण का
यह खेल पुराना है।

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मृत्यु की हंसी,
यम का बुलावा है।
किया जो, हुआ जो,
क्यों पछतावा है।

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कराह उठता हूं,
कुंठित मन मेरा है।
दुख की नैया पर,
काले मेघों का घेरा है।

-Harminder Singh





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