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मेरी दादी

dadi, grandmother, budhapaएक वृद्धा ने मुझे बताया था कि जीवन बूढ़ा होकर भी उतना बुरा नहीं। उन्होंने मुझे यह एहसास कराया कि बुढ़ापा ठहरा हुआ नहीं होता, बल्कि इंसान इससे बहुत कुछ सीखता है।

दादी को गुजरे काफी समय हो गया। लेकिन आज भी मैं उन्हें अपने करीब महसूस करता हूं। सच में वे मुझसे बहुत प्यार करती थीं।

बचपन में दादी के साथ बिताये वक्त को अपना सबसे शानदार और खूबसूरत मानता हूं। एक छोटा बच्चा किती खुशी का अनुभव करता है जब उसे ऐसे किसी व्यक्ति का साथ मिले जो उसकी हर बात को माने। ‘न’ सुनने की फुर्सत मुझे नहीं थी। जिद्दी किस्म का बच्चा होने के कारण भी मैंने दादी के सामने कभी जिद नहीं की। इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि वे मुझे समझती थीं, शायद हर किसी से कुछ ज्यादा ही।

बुढ़ापे की आड़ी-तिरछी लकीरों वाले चेहरे पर किसी वृद्धा की सहजता, संतुष्टि और ममता की ओस के छीटें देखता तो पाता कि मेरी दादी संसार की सबसे अच्छी इंसान है। उसका दिल इतना बड़ा है कि दुनियाभर की लाखों दादी उसके सामने छोटी हैं।

प्रेम और इतना प्रेम करती थीं कि शब्द छोटे पड़ जायेंगे, उसे बयान करना मुश्किल है।

गांव से सफर के दौरान थक जातीं दादी, मगर मेरा चेहरा देखकर उनकी थकान उड़ जाती। मुझे उन्होंने कई कहानियां सुनाईं जिनमें जीवन का सच छिपा होता। उन्हें हमेशा हमारी फिक्र रहती। जितने शब्द उनके मुख से निकलते, एक-एक मायने वाला होता।

सबसे मजेदार बात यह थी कि दादी को गुस्सा बिल्कुल नहीं आता था।

मेरा लगाव उनके उतना ही है। मैं जानता हूं कि लगाव एक अहम जुड़ाव ही तो है जो एक इंसान को दूसरे से जोड़े रखता है, उसके जाने के बाद भी।

-Harminder Singh




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1 comment:

  1. प्रिय हरमिंदर जी ,
    दादी को समर्पित इस पोस्ट ने बहुत ही भावुक कर दिया । मेरी दादी अभी जीवित हैं और जीवन का शतक लगाने वाली हैं , आज उनकी नज़र बेशक कमज़ोर हो गई है किंतु स्नेह की उष्मा अधिक हो गई है । सुंदर पोस्ट

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