दिल मान जाता है

heart, love, open letters
मेरी मानो हर मुद्दे पर दिल को बीच में मत लाओ। वह काफी हद तक बेवकूफ भी है...
नैना....

  तुम्हारी आंखें बहुत खूबसूरत हैं। उनमें कोई भी खो सकता है। तुम्हारी मासूमियत का मैं कायल हूं। चश्मों में तुम बिल्कुल बुरी नहीं लगतीं। पता नहीं तुम्हें यह सब उतना सहज लगता भी है।

कम और धीरे बोलने की आदत तुमने अंजलि से सीखी है। जानती हो तुम में कई खूबियां हैं जो दूसरों को प्रभावित करती हैं। हमें हमारी विशेषताएं ओरों से अलग बनाती हैं। हम दूसरों की नजर में अच्छे बने रहते हैं क्योंकि हमारा दिल भी साफ होता है।

तुम थोड़ा शर्माती हो। शायद लड़की होने की वजह से यह सब हो, मगर तुम शर्माती हुई भी उतनी ही सुन्दर लगती हो। तुम्हारी सुन्दरता तब भी कम नहीं होती जब तुम गुस्सा करती हो। शुक्र है अंजलि की तरह तुम्हारी नाक और चेहरा लाल नहीं होता।

लाइफ के किसी कोने में तुम कई बार खुद को अकेला पाती हो। शायद तुम कन्फ्यूज खुद से हो जाती हो। तुम काफी समझदार हो, इसलिए संशय को स्वयं से दूर जाने की कोशिश भी करती रहती हो।

जब मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूं तो गंभीर हो जाता हूं। तुम्हारी जिंदगी में प्यार की परिभाषा ज्यादा पेचीदा है। बिना सोचे-समझे किसी से भी लगाव करने लग जाती हो। यह जानते हुए भी कि कुछ चीजें निश्चित दूरी पर ही अच्छी लगती हैं, लेकिन तुम उस दूरी को मिटाने की कोशिश करती हो। वैसे तुम समय के साथ बहुत कुछ सीख रही हो। मुश्किल होता है कुछ लोगों को भुलाना। शुरु में परेशानी दिल जरुर महसूस करता है, पर धीरे-धीरे सब ठीक हो जाता है।

मेरी मानो हर मुद्दे पर दिल को बीच में मत लाओ। वह काफी हद तक बेवकूफ भी है क्योंकि कहीं भी दौड़ पड़ता है। मैंने दिल को मनाना सीख लिया है और वह आसानी से मान भी जाता है। कोशिश कर के देखो, तुम भी ऐसा कर सकती हो। सचमुच दिन मान जाता है, मनाकर तो देखो।

तुम्हारा

अमित।

-Harminder Singh

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1 comment:

  1. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

    करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच |

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