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क्यों होता है ऐसा?


इतनी खुशियां क्यों पल भर में सिमट जाती हैं? क्यों ऐसा होता है जब कोई आपसे दूर होता है? क्यों लगता है ऐसा कि आप कुछ कहना चाह रहे थे और कह न सके? क्यों ये दिल धड़कता है किसी के लिए? क्यों थम जाती हैं सांसें उस वक्त जब आप के सामने बैठा हो कोई ऐसा जिससे कहने की हिम्मत आप अरसे से जुटा रहे थे?

जानते हैं हम कि जिंदगी के रास्तों पर निकलता हुआ इंसान खोया-खोया और अजीब तरह का होता जाता है। ऐसा जो पहले उसने स्वयं को कभी महसूस नहीं किया।

  एक छोटी सी बूंद जो चंद पलों में अपना अस्तित्व खो चुकी लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उसका अपना वजूद था। हमने खुद को बोया, उपजा और खत्म किया है। हम रोये और खुश हुए हैं।

  इतना कुछ बीता है, बीत रहा है और उम्मीद यही है कि अच्छा बीतेगा। फिर क्यों समझा रहे हैं हम अपने आप को?

एक तसल्ली के लिए कि शायद जिंदगी भविष्य में इतने सवाल न करे।

हां, हल निकलने के लिए हमेशा नहीं होते।

-Harminder Singh


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