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जीवन -एक कविता



आया तो जाने के लिये जाता है,
जीवन है नहीं अपना, लेकिन
भरोसा दिलाया जाता है,
गीत है यह जो बहता है बस यूं ही,
झोंके से तिनका उड़ा,
पता नहीं कहां गया,
इंसान भ्रम में जीता जाता है,
बदलने की कोशिश करता है कितनी,
लाख तरीके अपनाता है,
जीवन को वह नहीं,
जीवन उसे छोड़ उड़ जाता है,
यही सार है,
यही जीवन-गाथा है,
सफल है जीवन उसी का,
जो जीवन को ढंग से अपनाता है,
रखा क्या जीवन में फिर भी,
जब मन किया साथ छोड़ जाता है,
दुख-पीड़ा, माया-मोह, नाते-रिश्ते,
सब यहीं रह जाता है।

-हरमिन्दर सिंह चाहल.

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