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मैं लडूंगा उम्र से


उम्र कह रही है आराम के लिये,
कुछ वक्त खुद को देने को,
मैं समझ नहीं पा रहा खुद को,
वक्त बड़ा या मैं,
गाड़ी है जीवन किस्मत की,
गति है भी नहीं भी,
लेकिन
उम्र बीतने के लिये है,
हां, बीत रहा हर पल।
मैं संशय में बैठ गया अकेला,
सोच रहा जाने क्या-क्या,
जीवन का गीत,
यादें ढेर सारी,
अपने-पराये,
खैर
उम्मीद लगाता हूं,
सूरज अस्त होगा,
मैं लड़ूंगा उम्र से,
जीत होनी है जीवन की,
पर मैं खुश हूं,
जूझना जानता हूं,
बुढ़ापे से जीतना नहीं।
-हरमिन्दर सिंह चाहल.

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