जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली

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जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली,
बिना बताये कि जाना कहां है,
उड़ रही हैं बातें, शब्द भी,
तैरती यादों को किनारे लगा आये,
बात बने तो क्या बने,
पीछे छूट गया कोई,

जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली,
खुशी के पलों को जीते हुए,
मगर कुछ कतरे गम के समेटकर,
नहीं आना, नहीं आना यहां,
दोबारा लौटना मुमकिन नहीं,
यह सांस के छूटने की बारी है,

जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली,
दो गज जमीन की तलाश पूरी हुई,
लकड़ियों की सजावट भी बनी कहीं,
विदाई थी, खामोशी थी,
विचार बह गये जहां बहना था,
तत्व मिल गये जहां उन्हें मिलना था।

-हरमिन्दर सिंह.

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