व्यायाम कीजिये, अच्छा खाइये और स्वस्थ रहिये

व्यायाम करना और अच्छा खाना यदि हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाये तो जिंदगी कितनी आसान हो जाये.
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मैंने व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। मेरा मानना है कि हर किसी को कम से कम दस-पन्द्रह मिनट रोज कसरत करनी चाहिए। जबतक हमारा शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा, हम ठीक से सोच भी नहीं सकते। साथ ही किसी भी कार्य को करने की क्षमता भी हममें कम होती जायेगी। उत्साह भी क्षीण होगा।

सुबह पांच बजे या कभी देर से उठा तो छह बजे हल्का व्यायाम करता हूं। रिलैक्स होने के लिए पहले थोड़ा दौड़ता हूं। उसके बाद शरीर खुल-सा जाता है। मेरा मानना है कि यह वह समय होता है जब हमारे शरीर में रक्त संचार बहुत तेजी से होता है और यह दिल तथा दिमाग दोनों को बेहतर करने में मददगार है।

पालथी मारकर कमर को सीधा कर बैठना। फिर नाक से सांस लेते हुए धीरे-धीरे छोड़ना बहुत कारगर तरीका है। सबसे मजेदार यह है कि हमें कहीं भाग-दौड़ नहीं करनी, बस एक जगह बैठकर खुद को स्वस्थ करने के लिए यह करना है।

मैंने सुना है कि लोग समय नहीं होने की बात करते हैं। यह सब वकवास है। अधिक से अधिक व्यस्त लोगों के पास भी समय है। फिर ऐसा व्यस्त रहना किस काम का जिससे आपका शरीर बीमार होने लगे। समय हर किसी के पास है। ये मन का आलस है जो आपको रोकता है। वैसे आजकल लोग स्वास्थ्य के प्रति काफी सचेत हुए हैं, सिवाय कुछ ‘आलसी’ लोगों के जो चुस्ती और ताजगी से परहेज करते हैं।



मैं कुछ आसान तरीकों का पालन करता हूं, जिनसे आप भी स्वास्थ्य के प्रति खुद को जागरुक कर सकते हैं और वह भी बिना अधिक मेहनत किये:
1. सबसे पहले यह मन बनायें कि आपको स्वस्थ शरीर चाहिए। दिमाग से वह बात निकल दें कि कैसे होगा? कोशिश कीजिये कुछ भी हो जायेगा।
2. शुरुआत कुछ दूर टहलने से की जा सकती है। मेरे पड़ोसी मेरी सलाह पर रोज टहलने जाते हैं। उसके बाद अन्य व्यायाम करने के प्रति स्वयं जागरुक हो गये। उनकी उम्र 70 से अधिक है और बुढ़ापे में भी चेहरे खिले रहते हैं।
3. एक घंटा से ज्यादा देर तक एक जगह बैठना नहीं चाहिए। मैं हर घंटे ब्रेक लेता हूं। पांच मिनट टहलता हूं। लेकिन दस-ग्यारह बजे के बाद यह ब्रेक डेढ़ या दो घंटे तक पहुंच सकता है। उस समय आप पांच मिनट कुछ दूर पैदल चलकर थकान को छूमंतर कर सकते हैं और फर्क आपको पहले दिन से ही महसूस होने लगेगा। मन बोझिल नहीं होगा, सुस्ती मिट जायेगी, दिमाग बेहतर काम करेगा। जो काम आप कर रहे हैं वह बिना टेंशन और थकावट के सरलता से होगा। लगातार बैठने से शरीर को फुर्तीला रखने वाली कोशिकायें सुस्त पड़ने लगती हैं। इसलिए ऊर्जा पाने और खुद को रिचार्ज करने का सबसे आसान तरीका लगातार एक जगह न बैठकर कुछ समय बाद पैरों को चलाने से भी है।
4. पानी दिन में कई बार एक गिलास से कम न पियें। यह आपको ऊर्जा देगा। मैं कम से कम दस गिलास पानी पीता हूं।
5. तली-भुनी चीजों से मैंने खुद को दूर रखा हुआ है। समय पर भोजन करना और ताजा फल खाना सबसे बेहतर है। हरी पत्तेदार सब्जियों को मैं शुरु से ही खा रहा हूं। घर की उगी सब्जियां हों तो क्या कहने। सर्दियों में मूली, शलजम, पालक आदि का लुत्फ उठाया जायेगा। कम जगह पर भी स्वास्थ्य के प्रति जागरुक लोग घर की उगी सब्जियों या फलों को खाते हैं। मैं भी ऐसा ही करता हूं।

हमारे पास खुद को स्वस्थ रखने के अलग-अलग तरीके मौजूद हैं, लेकिन खुद ही ढील करना मानो आदत में शुमार हो गया है। व्यायाम करना और अच्छा खाना यदि हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाये तो जिंदगी कितनी आसान हो जाये। वैसे भी स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन है।

-हरमिन्दर सिंह.

I am joining Saffola #ApneTareekeSeHealthy initiative and sharing my ways of being healthy in association with BlogAdda.

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2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन श्रद्धांजलि : एयर मार्शल अर्जन सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. शुक्रिया हर्षवर्धन जी..

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