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इस बार क्या नया होता है?






















अनमोल.......

तुम्हारे बारे में मेरे पास कहने के लिए उतनी मजेदार बातें नहीं, जितना शुभी के लिए कह सकता है। वह है तुम्हारी बहन, लेकिन तुम्हारा व्यवहार उसके बिल्कुल उलट है। हो भी क्यों नहीं, अपने पापा की छाप तुमपर अधिक पड़ी है, और तुम्हारी शक्ल बिल्कुल उनके जैसी है। रही बात शुभी की तो वह हमेशा गोलमटोल रहेगी और खिलखिलाती रहेगी। वैसे वह रोती हुई भी उतनी ही सुन्दर लगती है।

तुम सीरीयस हो, तुम हार्ड वर्किंग हो, और मेहनत करने से तुम्हें डर नहीं लगता। शुभांगी की तरह तुमने भी कुछ खासियतों को खुद से दूर नहीं होने दिया क्योंकि तुम दोनों जानते हो कि लाइफ में इनका कितना महत्व है।

चीजें ऐसा नहीं कि हमेशा हमारे बस में होती हैं, मगर अगर हम चाहें तो अपनी मुट्ठी में कितना कुछ पा सकते हैं। इसके लिए सिर्फ अनुशासन की जरुरत है। हम अच्छी तरह जानते हैं कि जिंदगी के कई पड़ाव ऐसे ही पार नहीं हो जाते, उनके लिए कठिन संघर्ष की जरुरत पड़ती है। मुझे मालूम है तुम्हें ऐसा करने में कोई हिचक नहीं होगी क्योंकि तुमने दूसरों से जो सीखा है, उसे अपनाया भी है। अपने बाबा से यह सीखा है कि दूसरों से मृदु व्यवहार किस तरह रखा जाए। अपनी मम्मी से अनुशासन में रहना सीखा और शुभांगी से यह सीखा कि चीजों को किस तरह व्यस्थित किया जाए। सच में तुम्हारी दीदी तुम्हारी, तुमसे कुछ साल बड़ी (थोड़ी गुस्से वाली) टीचर की तरह है। तुम्हारे पापा ने तुम्हें सिखाया कि ‘हा’ और ‘ना’ के बीच में फर्क क्या है?

अनमोल, तुमने मुझसे एक बार कहा था कि हर किसी में कोई न कोई खासीयत होती है। फिर मैंने कहा था कि जहां हमें अच्छी बातें सीखने को मिलें हम उन्हें अपनाते जाएं। इस बहाने खराबियों से हम आटोमैटिकली दूर होते जाएंगे। इससे हमारी लाइफ में कई त्रुटियां दूर होंगी।

कुछ बातें इसलिए शुरु की जाती हैं ताकि खत्म हो सकें। वैसे हर शुरुआत इसलिए ही की जाती है ताकि उसका एक सुन्दर अंत हो सके। इसलिए लोग याद रह जाते हैं और उनके द्वारा कही गयी ढेर सारी बातें भी। जहां किसी चीज की एडिंग हो रही होती है, ठीक उसी के साथ कोई नयी शुरुआत हो रही होती है। देखते हैं इस बार क्या नया होता है?

अनगिनत शुभकामनाएं।

-Harminder Singh

10 march 2011

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