जाते-जाते वह कितना सिखा गया


एक साथी का स्थान बदलकर चले जाना मुझे भावुक कर गया। मैं स्वयं समझ नहीं पा रहा कि मैं इतना भावुक कैसे हो गया, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मेरे साथ ऐसा ही हुआ था। मैं अपनी आंखों को चंद सैकण्डों में गीला कर चुका था। रुमाल का सहारा नहीं लिया गया था। न ही किसी तौलिया का इस्तेमाल हुआ था। पानी से चक्षुओं पर बौछार करना जायज नहीं लगा। उन्हें उनकी दशा पर छोड़ दिया गया था। वे किसी खूबसूरत नयनों वाली लड़की की आंखें नहीं थी, वरना काजल का इतराना बनता था।

  उसका नाम किन्हीं कारणों से यहां दर्ज नहीं किया जा रहा। मैं जानता हूं कि वह भी अच्छी तरह समझता है कि ऐसा क्यों किया गया।

  पहले दिन से शुरुआत की जाये तो उसके बारे में तभी से चर्चायें प्रारंभ हो चुकी थीं कि वह अधिक समय टिक नहीं पायेगा क्योंकि कुछ लोग उसे भाव बिल्कुल नहीं देने की सोच रहे थे। उन्हें लग रहा था कि वह बाहर का प्राणी है  जबकि अपनी मधुर मुस्कान के कारण वह सबके दिल में बस गया। और ऐसे बसा कि कमबख्त बाहर ही नहीं आ पा रहा। यार, तुम इतने जिद्दी न थे! यह आखिर हुआ कैसे? भइया कौन सी चक्की का आटा खाते थे? इसके अलावा एक सवाल और बनता है -आप किस तरह की विद्या में पारंगत थे कि आपने कईयों को सामने, तो कईयों को पीछे भावुक कर दिया!

 
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  उसने खुद को काम के बोझ तले दबा लिया था। लेकिन एक मुस्कान को उसने हमेशा बचाये रखा ताकि काम की थकान उसपर हावी न हो। वह जानता था कि पाटों के बीच चलना खतरनाक होता है, वह चल रहा था। वह अपने परिवार को जितना समय दे सकता था दिया, मगर काम प्राथमिकता थी। उसने समय को मोड़ने की कोशिश नहीं की, न ही किसी तरह की जद्दोजहद का खुद को शिकार होने दिया। वह स्वयं को बचाता रहा।

दिल और दिमाग के बीच का फासला वह जानता था। उसने यह कभी नहीं बताया कि वह यह कैसे कर पाया, मगर वह 365 दिन यह करता रहा। यह उसकी मजबूती का एक प्रमुख कारण था।

  भावनाओं की अहमियत उसे मालूम थी। वह प्रोफैशनल जिंदगी के मोड़तोड़ समझ रहा था। यह सच है कि उसे उसमें पारंगत होने में अभी वक्त लगेगा। वह बुत नहीं था, न ही ढीठ उन चंद लोगों की तरह जिनका काम ही सबकुछ होता है। ये वे लोग होते हैं जो जिंदगी भर दूसरों की बजाते हैं और बाद में इनकी बजती है।

  कुछ बातें जो कुछ अच्छी बातें लिखने पर मजबूर कर गयीं, सिर्फ उस साथी की वजह से :

1.    हमारा काम अहम होता है, लेकिन अच्छे काम करने वाले दूसरों को भी बराबर अहमियत देते हैं।
2.    मुस्कान राहत पहुंचाती है। उसे अपनाना चाहिए। किसी का मुस्कराता चेहरा दिन बना सकता है और दिन भर की थकान को पल भर में मिटा सकता है। मुस्कराते रहिये इंसानों की तरह। फिर देखिये जिंदगी आपको कितना कुछ दे जाती है।
3.    बोझ चाहें कितना भी क्यों न हो, उसे कभी भारी मत समझिये। यह एक तरह से आपको मानसिक रुप से अधिक क्षति पहुंचायेगा जबकि शारीरिक तौर पर आप पहले ही हार चुके होंगे। दूसरों को देखिये वे किस तरह बोझिल होने से स्वयं को बचाते हैं। सबसे आसान है उस बोझ को हल्का समझना। ऐसा करने से आधा बोझ वैसे ही कम हो जायेगा। यह सारा खेल हमारी समझ पर निर्भर करता है। बस मानते रहिये कि कुछ बोझ है ही नहीं।
4.    दूसरों की खुशी में शामिल होने से स्वयं को मत रोकिये। उनकी खुशी को अपनी खुशी मानकर समेटिये। यह आपकी जिंदगी को भी खुशियों से भर देगा।
5.    दूसरों के बारे में विमर्श कीजिए। उनके बारे में गलत बयानी करने से बचकर आप स्वयं को व्यर्थ की उलझनों से भी बचाते हैं।
6.    जमीन के तल पर रहना सीखिये। हवा में उड़ने से पंक्चर होने के चांस नहीं रहते, लेकिन गिरने के बाद परिणाम बहुत घातक होते हैं।
7.    विनम्रता को अपने साथ लेकर हमेशा चलिए। यह कभी नुकसान नहीं पहुंचाती। इतिहास बताता है कि विनम्र लोग ही बेहतर ताल्लुकात रखते हैं।

-Harminder Singh

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