विदाई


जिंदगी एक सुहानी शाम है,
हरियाली बस रही चारों ओर,
चहचहा रहीं कोपलें मुस्कान के साथ,
क्या मौसम है,
क्या पल हैं,
सुकून है हर तरफ,
उजाला है बिखरा रात में,
दिन निकला सवेरा हुआ,
बोलीं चिड़िया झुंड में,
शोर नहीं, चुप कहीं,
नहीं आया कोई आज,
अकेलापन, वही उदासी,
जिंदगी की खामोशी,
क्या हुआ,
क्या किया,
समय का खेल वही पुराना,
जीवन उसी तरह होना है,
तय है जो हुआ,
अब वक्त विदाई का आया,
चलते हैं दूसरे देश,
आना नहीं वापस मुझे,
न आ सकता हूं,
विदा हुआ जीवन मेरा!

- हरमिन्दर सिंह चाहल.

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2 comments:

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