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हम दो हमारे दो


बढ़ती महंगायी और बेरोजगारी देश की दो बड़ी समस्यायें हैं। ये दोनों समस्यायें लगातार बढ़ रही हैं जबकि हर नयी सरकार के आने पर इन मुसीबतों को कम करने की जनता उम्मीद करती है फिर भी दोनों मुसीबतें कम होने के बजाय और बढ़ जाती हैं। केन्द्र में भारी बहुमत प्राप्त कर सत्ता में आयी भाजपा सरकार इन दोनों मुसीबतों से जनता को मुक्ति दिलाने के वायदों का चुनाव में जमकर प्रचार करती रही थी। अब देश की जनता उसकी ओर देख रही है कि कब महंगायी कम हो और बेरोजगारों की फौज को रोजगार मुहैया हों।

  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रीमंडल ने अभी तक कोई ऐसा सन्देश जनता को देने में सफलता नहीं पायी जिससे यह पता चले कि इन दो प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए वह क्या करना चाहती है? चुनावी सभाओं में चीखने वाले नरेन्द्र मोदी की आजकल बोलती ही बन्द है। लगता है वे गहन चिन्तन मनन में हैं। जबकि महंगायी और बेरोजगारी लगातार छलांग लगाकर आसमान छूती नजर आ रही है।

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  चालीस दिन के अपने सफर में जो कुछ इस सरकार का काम जनता के सामने आया है वह सब कांग्रेस के द्वारा शुरु किये काम को उसी की तर्ज पर चलाये रखना दिखाई दे रहा है। कांग्रेस द्वारा उधमपुर कटड़ा रेल सेवा का पूरा किया काम जिसका उद्घाटन पीएम ने किया। रुस से कांग्रेस सरकार द्वारा खरीदे आइएनएस विक्रमादित्य युद्ध पोत को नौसेना को सौंपना ऐसे ही काम हैं जिन्हें कोई भी सरकार करती। स्वयं भाजपा सरकार के मंत्री और प्रवक्ता कह भी रहे हैं कि यह सभी निर्णय उनके नहीं बल्कि उनकी परवर्ती कांग्रेस की यूपीए सरकार के थे। लोग असमंजस में हैं कि कहीं यह सरकार यूपीए की काॅपी तो नहीं।

  ऊपर जिन दो बड़ी राष्ट्रीय समस्याओं का उल्लेख किया है उनके समाधान में सबसे बड़ा रोड़ा बढ़ती आबादी है। हम बार-बार चीन की बराबरी करने की बात करते हैं। उसकी प्रगति में सबसे बड़ा काम वहां की बढ़ती आबादी पर ब्रेक लगाने से हुआ है। वहां लम्बे समय तक एक से अधिक बच्चा पैदा करने पर पाबन्दी है। जबकि हमारे यहां आठ-आठ, दस-दस बच्चे वे लोग लिए फिर रहे हैं जिनके पास आम जीवन जीने के भी आवश्यक संसाधन नहीं। बहुत से लोगों के पास रहने तक को छत नहीं लेकिन बच्चे पैदा करने में वे साधन सम्पन्न लोगों से भी आगे हैं। देश में प्रति वर्ष सवा करोड़ से अधिक बच्चे जन्म लेते हैं। जबकि देश के संसाधनों में इतनी वृद्धि हो नहीं पाती। ऐसे में बेरोजगारों की फौज लगातार बढ़ती जा रही है। उसके भरण पोषण की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी इसी कारण उछाल आता रहता है।

  केन्द्र सरकार सख्ती से हम दो, हमारे दो का कानून लागू करे। यदि इसे अब लागू किया जायेगा तब भी हमें हालात सुधारने में लगभग दो दशक लगेंगे। हमें बेरोजगारी और महंगायी के साथ ही इससे बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी काबू पाने में तब सफलता मिलेगी।

  वैसे अभी तक सरकार में कहीं भी इस तरह का कदम उठाने की फुसफुसाहट सुनाई नहीं देती। आबादी नियंत्रण के बिना देश की तरक्की के बारे में अब सोचना भी अविवेकपूर्ण होगा।

-हरमिन्दर सिंह चाहल

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