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नई किताब, पुरानी किताब



किताबों की अलमारी में कुछ पुरानी किताबों को जगह दी। नयी किताबों को थोड़ा अटपटा लगा होगा। उन्होंने शायद सोचा होगा कि इन्हें अब "रिटायर" हो जाना चाहिये था। उम्र के साथ यह अत्याचार है। 

नई किताबों की सोच का मतलब मैं समझ गया। मैंने पुरानी किताबों को नयी जिल्द दी। वे खुश थीं। यह एक तरह से पुराने ठूंठ पर नये पत्ते उगाने की तरह था। लेकिन उम्र बीतने पर वापस नहीं आती।

मन के किसी कोने में थोड़ी चुभन बाकी रह गयी जो मुझे महसूस हुई। पुरानापन कहीं न कहीं सालता है। कभी लगता है जैसे जिंदगी की रौनक छंट गयी जबकि वही वास्तविकता है, तो कभी हार का गुस्सा हावी हो जाता है, जो हम पर निर्भर करता है।

किताब नई हो या पुरानी उसमें ज्ञान है। ज्ञान कम नहीं होता। एक-एक शब्द की कीमत है। उम्र का हर पल, हर हिस्सा नया सिखाता है। नये की प्रेरणा देता है। न रूकने वाला हौंसला देता है। 

इस कोने भाव जो भी हो, या उस कोने कोई विचार, मन तो समझने में व्यस्त है। नई किताब और पुरानी किताब में फर्क हो सकता है लेकिन उनसे सीखा जा सकता है। यकीनन सकारात्मक कहीं से भी सीखा जा सकता है। वे आपस में मतभेद रख सकती हैं, लेकिन ज्ञान की कुंजी हैं, ठीक मानव की तरह।

-हरमिन्दर सिंह चाहल.

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