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आर.के. लक्ष्मण : आम आदमी का जाना


वे चले गये और बिना बताये उनकी आंख हमेशा के लिये लग गयी। पिछले पचास साल से टाइम्स आफ इंडिया के लिये कार्टून बनाने वाले आर.के. लक्ष्मण अब हमारे बीच नहीं रहे। रह गये तो उनके बनाये "आम आदमी" के कार्टून जिसे लोग "कोमन मैन" के नाम से जानते हैं। यह चरित्र हमेशा उनके चाहने वालों के जेहन में रहेगा।

94 साल की उम्र में 26 जनवरी के दिन आर.के. लक्ष्मण ने दुनिया को अलविदा कह दिया। संक्रमण के कारण बीमार थे। उनके कई अंगों ने काम करना भी बंद कर दिया था।

कभी आर्ट कालेज में उन्हें भर्ती करने से मना यह कहकर कर दिया गया था कि "उनमें रचनात्मकता की कमी है।" वही व्यक्ति बाद में मशहूर कार्टूनिस्ट बना जिसकी रचनात्मकता का कायल हुए बिना कोई रह न सका। उनकी दो बार शादी हुई। पहली पत्नि भरतनाट्यम और फिल्मी अभिनेत्री कमला थीं जिनसे बाद में लक्ष्मण अलग हो गये। दूसरा विवाह उन्होंने कमला से ही किया जो लेखिका थीं जिन्होंने बच्चों के लिये काफी लिखा। उन्हें हम कमला लक्ष्मण के नाम से जानते हैं।

आर.के. लक्ष्मण के बड़े भाई जानेमाने उपान्यासकार आर.के. नारायणन थे। वे उनकी कहानियों से बहुत प्रभावित होते थे। उनके किरदारों में आम आदमी का संघर्ष नारायणन के पात्रों से प्रभावित रहा।

1951 से टाइम्स आफ इंडिया में उन्होंने अपना मशहूर आम आदमी बनाना शुरू किया। अपने किरदार के माध्यम से वे लोगों के मुद्दों को उठा रहे थे। एक तरह से मजाक के लहज़े में वे आम जीवन और उससे दो चार होने वाले आदमी की वास्तविक जिंदगी को दिखा रहे थे। राजनीति और आम आदमी की खींचतान को भी वे अपनी कूची से रच रहे थे। उसके दुख-दर्द को उकेरते रहे। उम्र के अनुभवों को समाते चले गये थे लक्ष्मण। मानो जीवित पात्र हैं और अपनी कहानी बयान कर रहे हैं। उनकी दुनिया में हास्य था, उसमें भावनाओं की चटनी मिली थी जिसका स्वाद कभी मीठा तो कभी तीखा हो जाता था। खट्टापन भी था जो अलग जायका बना देता था।

उनके कार्टून चरित्रों पर आधारित कार्यक्रम बहुत पसंद किया गया। नाम था -आर.के. लक्ष्मण की दुनिया। इसका प्रसारण नवंबर 2011 से मार्च 2013 तक सब टीवी पर किया गया था। कम समय में यह कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हो गया था।

लक्ष्मण नहीं हैं लेकिन उनकी बसाई दुनिया हमारे बीच है जो आम आदमी की कहानी कहती रहेगी। पात्र बोलते रहेंगे उसी तरह।

लक्ष्मण को वृद्धग्राम का शत् शत् नमन!

-हरमिन्दर सिंह चाहल.

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