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जीवन का उत्सव


बूंद जो मुस्करा रही है….
कोई गीत गा रही है….

जीवन का उत्सव है यह….
हरियाली जो समा रही है….

उजली धूप परछाईं बन आयी….
किरणों की लौ मुस्का रही है….

धूल चली पांव-पांव….
मंद पवन गुनगुना रही है….।

हरमिन्दर सिंह

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