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एक कैदी की डायरी- 28

शाम को भोजन के समय सादाब को एक कैदी ने उसकी बहन के बारे में गलत कह दिया। सादाब ने अपने आगे रखी थाली उसके सिर पर दे मारी। वह कराहता हुआ पीछे गिर गया। मैंने और साथी कैदियों ने सादाब को बड़ी मुश्किल से रोका, नहीं तो वह उसकी जान ले लेता। क्रोध की ताकत अदभुत होती है। उसे पैदा करना आसान है, काबू करना मुश्किल।

जेलर को मौका चाहिए था। उसने सादाब को अपने कक्ष में बुलाया। वह भूखा था। रात भर वह नहीं आया। मुझे उसकी काफी चिंता हो रही थी। मैं कई बार सोचता हूं कि फिक्र कितनी बड़ी चीज है। जिनसे हम जुड़ाव महसूस करते हैं, हमें उनसे लगाव है, हम उनकी फिक्र करते हैं। यह मन के भावों से जुड़ा है। उनसे थोड़े समय की दूरी हमें परेशान करती है।

जेलर को चाहिए क्या? वह अपनी आदत को नहीं भुला सकता। उसने सादाब को कुर्सी से बांध दिया था। उसकी बुरी तरह पिटाई की। वह कराहता रहा, जेलर की क्रूरता चरम पर थी। कमजोर की कमजोरी का नाजायज लाभ था वह।

सादाब को यह सब क्यों सहना पड़ रहा है? शायद उसकी किस्मत खराब है। उसने अपने ऊपर बीती को मुझसे छिपाया नहीं। वह मुझपर बहुत विश्वास करता है, और मैं भी उसपर। भरोसे ने हमारे लगाव को और मजबूत कर दिया है। उसके हाथों की कलाईयों पर रस्सी के निशान साफ झलकते हैं। कितना दर्द हुआ होगा उसे। शायद बहुत। उसकी टांगें बेंत की चोट से सूज गयीं। वह ठीक से चल नहीं सकता। इसलिए मैं उसे सहारा देता हूं। फिर भी वह मुझे देखकर मुस्कराता है, मैं भी।

हम दोनों बहुत समय से वक्त साथ बिता रहे हैं। समय कितना बीत गया पता कैसे चलता, हमने बातें जो इतनी की हैं, यादों को ताजा किया है और जीवन के कड़वेपन को साथ मिलकर बांटा है। उसके और मेरे विचारों में शायद अब समानता सी आने लगी है। हम किसी की सोच को पढ़ तो सकते नहीं, लेकिन उसके विचारों की गहराई को समझ लेते हैं। उसने मुझसे कहा कि अभी तक उसके विचार दो लोगों से ही मिल सके हैं -उसका एक पुराना साथी और मैं। इसपर मैं चौंक गया। सादाब ने बताया कि वह उसका पक्का मित्र था, लेकिन वह उसे छोड़ गया। मैंने कहा कि मैं उसका मित्र नहीं।

अभी शायद हम तय नहीं कर पाये कि मैं और सादाब विचारों में एकरुपता किस हद तक रखते हैं। उसका मानना सही है कि जिसे वह अपना मानने लगता है, वह उसे छोड़ कर चला जाता है। मेरे साथ भी वैसा ही हुआ है। पर सादाब को इस बार कोई छोड़कर जाने वाला नहीं, वह उसे खुद छोड़कर जायेगा। मेरी सजा कितनी लंबी है यह वक्त भी नहीं जानता। सादाब जल्द इस कैदखाने से आजाद हो जायेगा।

-Harminder Singh





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