एक कैदी की डायरी -30

jail diary, kaidi ki diaryजब मैं सुबह उठा तो देखा कि सादाब की टांग से खून बह रहा था। मुझे पहले हल्का गुस्सा आया कि उसने मुझे बताया नहीं। थोड़ी देर में मैं सब समझ गया। बहुत ख्याल रहता है शायद उसे मेरा। शायद वह मुझे दुखी नहीं देखना चाहता। उसका प्रेम अद्भुत है। यह संसार की बड़ी सच्चाई है कि हम न कहकर भी बहुत कुछ कह जाते हैं। एक इंसान, एक इंसान के लिए कितना करता है। जमाना उसे देखे या नजरअंदाज करे, इंसान का प्यार उभर ही आता है। मैं थोड़ा भावुक हो गया। मेरे हृदय को लगा कि सादाब मेरे लिए और कितना सहेगा। यह अजीब है कि हमसे एक दूसरे का दुख देखा नहीं जाता।

मैं उसे खुश रखने की कोशिश करता हूं, वह मुझे। इस तरह हम दोनों कुछ पलों में जिंदगी के कड़वे पलों से खुद को दूर कर लेते हैं। और सोचते हैं कि कोई भी हमारी तरह असहाय न हो, बेबस न हो। वह इतना कहता है कि उसकी ख्वाहिश है कि वह मुझे कभी रोता हुआ न देखे। हमें जिनसे लगाव होता है उनकी नम आंखों को देखकर हमारा मन भी मुस्कराना भूल जाता है।

सादाब का घाव गहरा होता जा रहा है। वह बुखार से तप रहा था। मैंने काफी समझाया कि वह दवाई ले ले। उसने इंकार कर दिया। उसे यह छोटी बात लग रही थी कि वह दवाई ले। ऐसे लोग कई गंभीर बातों को भी छोटा समझते हैं। वे लापरवाही कर जाते हैं जिसका परिणाम सही नहीं रहता।

सादाब की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। मुझे उसकी इतनी फिक्र हो रही थी कि मैं रात भर ढंग से सो नहीं पाया। नींद आती कहां से, सादाब का चेहरा हर बार आंखों के सामने उभर आता। उसकी मुस्कराहट, बहते आंसू और गंभीर भाव मुझे सोचने पर मजबूर कर देते। चिंता में बीती रात सुबह पर असर डालती है। मेरे लिए यह परेशानी का वक्त था। मेरा मस्तिष्क तरह-तरह के विचारों से भरा था।

to be contd....

-Harminder Singh



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