अच्छे लोग, बुरे लोग

सच है कि अंधेरा प्रसन्न है। सच है कि वह वहां है जहां उजाला नहीं। यह भी सच है कि वह हमेशा से रहा है, लेकिन उजाले ने उसे वजूद दिया है, आधार दिया है।

‘दुनिया कई किस्म के इंसानों से भरी है। अच्छे लोग अपनी अच्छाई के लिए जाने जाते हैं और बुरे लोगों की बुराई उनकी पहचान है। जीवन में हर किसी का सामना इंसानों की दो किस्मों से होता है। कुछ उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ जाते हैं, कुछ वहीं ठहर जाते हैं। जबकि कई ऐसे होते हैं जो बुराई का सामान इकट्ठा करने में व्यस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बुरे बनकर, बुरे काम कर जीवन में ऊंचाईयां हासिल होती हैं। भ्रम में जीते हैं ऐसे लोग क्योंकि बुराई जितनी तेजी से ऊंचायी पर व्यक्ति को लेकर जाती है, उसी तेजी से उसका पतन भी कर देती है।’
बूढ़ी काकी ने मुझसे कहा।

‘फिर भी बुराई हंसती है, गुमान में जीती है।’ मैं बोला।

इसपर काकी ने कहा :
‘सच है कि अंधेरा प्रसन्न है। सच है कि वह वहां है जहां उजाला नहीं। यह भी सच है कि वह हमेशा से रहा है, लेकिन उजाले ने उसे वजूद दिया है, आधार दिया है। तुम जानते हो कि बुराई दिल खोलकर हंसती है। उसे हमेशा धुन सवार है विजय की। वह विजेता बनती भी है, तब जब अच्छे लोग आशा में नहीं जीते, संघर्ष करने से पीछे हटने की कोशिश करते हैं।’

‘बुराई का दबाव हमेशा रहा है। बुरे लोग अच्छे लोगों को बढ़ने से रोकते हैं। उन्हें सिर्फ स्वयं से सरोकार रहता है। यही वजह है कि वे मिलकर चलने में असमर्थ हैं। मैंने अपने जीवन में ऐसे लोगों से मेलजोल नहीं रखा जिन्होंने स्वार्थी होकर जीवन को जिया। मैं ऐसे लोगों से सदा दूर रही जो बुरे थे।’

‘मैं जानती हूं बुराई तेजी से फैलती है। बुरे इंसान अपना दायरा बढ़ाते हैं।’
इतना कहकर काकी चुप हो गयी।

सच में जीवन में अच्छे और बुरे, दोनों तरह के रंग बिखरे हैं। शायद यही वजह है कि जीवन में उतार-चढ़ाव भी आते हैं।

-harminder singh


2 comments:

  1. यही तो जीवन है आपको तय करना है कि आपको क्पुन सा रंग पसंद है .... जीवन के इन्हे उतार चढ़ाव को एक अलग नज़र से देखती हुई मैंने भी एक पोस्ट लिखी है यदि आपको कभी समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  2. जबकि कई ऐसे होते हैं जो बुराई का सामान इकट्ठा करने में व्यस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बुरे बनकर, बुरे काम कर जीवन में ऊंचाईयां हासिल होती हैं। भ्रम में जीते हैं ऐसे लोग क्योंकि बुराई जितनी तेजी से ऊंचायी पर व्यक्ति को लेकर जाती है, उसी तेजी से उसका पतन भी कर देती है।’
    ..सोलह आन्ने सच बात..काकी और बोडी की बातें गहरे अनुभव की बाद ही समझ आती हैं ..
    आपका आलेख पढ़कर काकी-बोडी की बहुत सी बातें याद आने लगी है..
    सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामना

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