माता-पिता और बच्चे

माता-पिता के पास बच्चों को लेकर कई तरह की चिंतायें हैं। बच्चे पढ़ते नहीं, उद्दंड होते जा रहे हैं, बगैरह, बगैरह। देखने में आया है कि कई माता-पिता इस कारण बीमार भी रहने लगे हैं। उनकी सेहत उनका साथ नहीं दे रही। रात में चैन ही नींद नहीं आती। दिमाग में बच्चे के बारे में विचार घूमते रहते हैं।

पारिवारिक माहौल अधिकतर दफा कारण माना जाता है बच्चों के माता-पिता की न सुनने का। अक्सर जिन माता-पिता के पास समय नहीं होता अपने बच्चों के लिए, ऐसे बच्चे जिद्दी और लापरवाह किस्म के हो जाते हैं।

दोस्तों की संगत का भी बाल मन पर भारी प्रभाव पड़ता है। दोस्त यदि अच्छे होंगे तो आपका बच्चा नकारात्मक सोच विकसित नहीं कर पायेगा। आसपास के लोगों का असर उसपर पड़ सकता है। उस वजह से भी वह स्वयं को ढाल सकता है। लेकिन घर का वातावरण सबसे अहम होता है।

हमारे एक पड़ोसी अपने इकलौते लड़के की हरकतों से परेशान हैं। वह बेहद जिद्दी है। कहना मानना उसने सीखा ही नहीं। परसों उसने चाय का भरा गिलास फर्श पर दे मारा। बेचारी मां ने फर्श से कांच के टुकड़े साफ किये। उसे डांटा तो वह गुस्सा हो गया और रोने लगा। मां ने उसे पीटा भी। फर्क क्या पड़ा है उसपर आजतक। काफी समय से वह ऐसे ही करता आया है।

बच्चों को अधिक पीटें तो वह ढीठ बन जाते हैं। प्यार से समझायें तो कुछ की समझ में आता है, कुछ की नहीं।

उद्दंड बच्चों की संख्या हमारे भारत में काफी है। कारणों को ढ़ूंढने निकलेंगे तो हमें मिलते जायेंगे। निदान करने की कोशिश की जा सकती है। मगर कई मौकों पर मुश्किल लगता है।


-harminder singh

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