मन से जिंदगी जियें

happy life
बूढ़ी काकी कहती है -‘लोग सुबह से शाम तक भागदौड़ करते हैं। आराम का वक्त मिलता नहीं। जिंदगी कभी-कभी बोझिल और थकी हुए लगने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे जीवन बेकार हो गया, नीरस हो गया। असल में यह कोशिश है इंसान को व्यस्त रखने की ताकि वह स्वयं से खफा न हो। ताकि वह काम करता रहे। वरना बिना भागदौड़ किये जिंदगी और बोझिल और थकी हुई लगेगी।’

‘जिंदगी आसान नहीं है। यदि ऐसा होता तो उम्र छोटी होती। मेरी समझ में जिंदगी रोचक है। हम उसके लिए जिम्मेदार हैं। क्यों रुके रहें, क्यों समय बर्बाद करते रहें। जब जिंदगी रुकने का नाम नहीं, तो जिंदगी का लाभ नहीं। मन से जिंदगी जियें हौंसला खुद-ब-खुद आ जायेगा। यह जिंदगी सिखाती भी है। सीखते जाइये और आगे बढ़ते जाइये। खुशहाली अपने आप दस्तक देती रहेगी। बस मुस्कराना मत छोड़िये।’

-हरमिन्दर सिंह चाहल.
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