क्या करें जो दिल न टूटे?

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टूटे हुए दिल को मनाने की कोशिशें हम करते हैं। कई बार सफलता मिल जाती है। कई बार ऐसा होता है कि बात बिगड़ जाती है। जबकि कई बार बात बनते-बनते खराब हो जाती है और इतनी की हम एक दूसरे की शक्ल से भी नफरत करने लगते हैं।

प्यार होने में वक्त नहीं लगता और न ही दिल टूटने में। प्यार जब होता है तो चारों ओर खुशियों का समन्दर नजर आता है। हम महसूस करते हैं कि तैर रहे हैं। डूबने का भय भी नहीं होता। प्यार में लोग अक्सर डूबते ही तो हैं। जी भर कर प्यार किया जाये तभी तो वह प्यार कहलाता है। हल्का-फुल्का प्यार थोड़े ही प्यार है। पक्का प्यार कीजिये, लेकिन समझ लीजिये वह कितने दिन तक मजबूती की मिसाल कायम रख सकता है। जितनी तेजी से प्यार होता है, मजबूती पाता है, उतनी ही जल्दी वह टूट भी जाता है और दूरियां बढ़ जाती हैं। एक-दूसरे से इतनी नफरत हो जाती है कि बात करना तो दूर चेहरों तक को देखकर गुस्सा आता है।

टूटे दिल को मनाने की कोशिश की जा सकती है। या फिर टूटन से पहले उसकी दवा ढूंढी जा सकती है। या ऐसा कुछ किया जा सकता है कि दो जनों के बीच में कभी दरार पैदा ही न हो।

एक दूसरे को समझना है जरुरी
दोनों को एक-दूसरे को समझना चाहिए। एक की बात को दूसरा नजरअंदाज न करे। अधिकतर देखा गया है कि लड़का या लड़की में से एक अपनी मांग रखता है, तो दूसरा उसे टाल जाता है या उस ओर ध्यान नहीं देता। ऐसा कई बार होता है तो दरार आनी स्वभाविक है। इसलिए दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को समझें। उनकी कद्र करें। सोच-विचाकर फैसला करें कि आगे क्या करना है। तकरार की गुंजाइश तब उत्पन्न होती है जब आप अपने बारे में अधिक सोचते हैं। अपने पार्टनर के बारे में उतना ही सोचे या फिर अपने से ज्यादा भी सोच सकते हैं। उसकी फिक्र कीजिये, लेकिन वह भी आपकी फिक्र करे, तभी गाड़ी पटरी पर दौड़ेगी।

बात-बात पर शक न करें
आजकल देखा गया है कि पार्टनर शक ज्यादा करते हैं। शक के कारण न जाने कितने रिश्ते बिगड़ गये। इस चक्कर में हर साल हजारों जोड़े बंधने से पहले ही अपनी जिंदगी बेकार कर लेते हैं। सुसाइड के केस भी कई बार सामने आये हैं क्योंकि वहां दिल हद से ज्यादा लगाव कर बैठा था कि उसे दूर जाना नागवारा नहीं, चाहें जान देनी पड़े।

पार्टनर को चाहिए कि वह शक के चक्कर में न पड़कर अपने आगे के जीवन पर ध्यान दें। एक-दूसरे को जानते हैं तो शक क्यों करते हैं? दरअसल तेज दौड़ती जिंदगी में दूसरों की बातों या कन्फयूशन के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं कि हम एक-दूसरे पर भरोसा करने से कतराते हैं। हम शक करते हैं क्योंकि हम अपने पार्टनर पर भरोसा नहीं करते। इसलिए शक को दूर रहने दें। किसी की सुनी-सुनाई बात पर ध्यान न दें। यदि ऐसा कुछ आपने देखा या पढ़ा तो बातचीत करें। ज्यादातर मसले बैठकर ही सुलझाये जाते हैं। बहुत से परिवार टूटने से बच गये। यदि वे भी आपसी लड़ाई-झगड़े को आगे बढ़ाते तो न बस पाते।

हंसी-खुशी का माहौल बनाये रखें
हंसना सेहत के लिए वरदान है। इसे जाया न करें। परिवार को हंसता-खेलता हर कोई चाहता है। फिर आप क्यों अपनी टेंशन को अपने पर हावी होने दें। मस्त रहें, मूड आफ होने से खुद को बचायें। मजाक की बात करें, चुटकुले सुनायें या फिर गायें।

प्रेम को अनमोल समझें 
प्यार अनमोल होता है। यह हम सभी अच्छी तरह जानते हैं। प्रेम हममें एक शक्ति भर देता है। एक तरह से हम चार्ज हो जाते हैं। एक नयापन आ जाता है। यह सेहत के लिए उत्तम है। प्यार की कद्र करनी चाहिए।

-हरमिन्दर सिंह चाहल.

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